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खुद ही अपना दुश्मन बन बैठा है मुसलमान, जानिए कैसे? पूरी पोस्ट पढ़कर खुद ही फैसला करें…

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हमारे मुहल्ले की छोटी सी मस्जिद की कमेटी से लेकर राज्य की हज कमेटी तक मे मुसलमानों के अंदर ना इत्तेफाकी आम बात है. यानि मिल कर कोई काम करेंगे ही नही, ज्यादातर जीतने भी मुस्लिम्स जिनहे अल्लाह ने खूब मालों दौलत से नवाजा है उनकी यहां की शादिया इस क़दर खर्चीली होती है कि उतने पैसों मे कई गरीब मुस्लिम बहनों का निकाह हो सकता है.

ये चीचें मुसलमानों को भारी नहीं लगती…
जिसे देखो अपने बच्चे की स्कूल फीस, ट्यूशन फीस, बस किराया, कापी किताब, ड्रेस, जेसी चीज़ों मे खर्च करने मे कोई बड़ी बात नही है, लेकिन एक आलिम या हाफिज़े कुरान जो 100 से 200 रुपए महीने मे घर आकर आपके बच्चो को दीनी तालीम दे सकता है वह सब को भारी लगता है.

दौलत और जायेदाद के लिए सगे भाई, या सगे भाई बहन, चाचा भतीजे, यहाँ तक की बाप बेटे तक मे लड़ाई देखने को मिल रही है. अगर किसी सुबह क्रिकेट खेलना हो तो उठ कर तैयार, लेकिन फ़जर के लिए फुस्स.

हफ्ते मे एक बार जुमे को मस्जिद आते है…
बिजली चोरी भी आम है. मेने खुद कई मुस्लिम घर देखे है जहा धड़ल्ले से बिजली चोरी की जा रही है. एक दूसरे की टांग खींचने मे हमे महारत हासिल है. यह ऐसा वो ऐसा, बस यही काम है मुश्किल हफ्ते मे एक बार जुमे को मस्जिद आते है और उनमे से आधे बिना सुन्नत पढे ही ऐसे भागते है जेसे शायद उन्हे पकड़ कर क़ैद कर दिया जाएगा.

पड़ोसी के यहाँ कुछ नई चीज़ आ गयी तो हमे जलन होती है. बहुत आम है यह भी झूठ, खुदारा इस क़दर ज़बान पर होता है कि शायद ही कोई बात सच हो.

मेरे पास वो है, मेरे जूते इतने के है…
माँ बाप बुलाये तो आनाकानी लेकिन लड़की या बीवी बुलाये तो फौरन हाजिर, मैं ऐसा, मेरे पास यह है, मेरे पास वो है, मेरे जूते इतने के है, मेरी कार इतने की है, हर कोई दिखावा दिखावा और बस दिखावा, मुस्लिम लड़को के हाथ मे आपको कडा मिलेगा, नाड़ा मिलेगा, कान मे बाली मिलेगी.

क्या यह आने वाली मुस्लिम पीढ़ी है?…
और तो और कभी कभी तो ऐसे लिबास पहने देखा हूँ कि यकीन करना मुश्किल होता है कि मर्दाना है या ज़नाना? हमारे 15-16 साल के ज्यादातर लड़के कुरान पढे हो या न हो कोई सूरत याद हो या न हो लेकिन गाने भी याद हो चुके होते है, क्या यह आने वाली मुस्लिम पीढ़ी है?

और भी सेकड़ों खामिया है आज हम मे जो क़ौम पहले दुनिया की तमाम क़ौमों की सरदार थी आज बदहाल होती जा रही है क्यू? सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल से दूरी इसकी वजह है, नेक बनिए, एक बनिए. अल्लाह हमे बुरे कामो से बचाये. आमीन

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