नहीं मैं राम विरोधी हूं और नही मेरे पिताजी थे, लेकिन बाबरी मस्जिद हमारी है: इकबाल अंसारी

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    लखनऊ: मैं राम विरोधी नहीं हू, अयोध्या में एक राम मंदिर नहीं बल्कि हजारों राम मंदिर बने, मुझे कोई शिकायत नहीं है. मेरा तो बस यही कहना है कि बाबरी मस्जिद हमारी है और इसी अधिकार की लड़ाई कई वर्षों तक हमारे पिता लड़ते रहे और उनके निधन के बाद अब मैं लड़ रहा हूँ. यह कहना है बाबरी मस्जिद एक्शन कमीटी के सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी के बेटे इक्बाल अंसारी का.

    नहीं मैं राम विरोधी हूं और नही मेरे पिताजी थे…
    बाबरी मस्जिद विध्वंस की पच्चीसवीं बरसी पर ई टीवी से बातचीत करते हुए इकबाल अंसारी ने कहा कि मैं राम विरोधी नहीं हूं. नही मेरे पिताजी थे. मेरे पिता और महंत ज्ञानदास की दोस्ती कितनी मजबूत थी यह हर कोई जानते हैं कि लड़ाई सिर्फ हक की है. जिस जगह राम लल्ला है वहां एक मस्जिद थी. हमारे पास सबूत हैं और हम वही लड़ाई लड़ रहे हैं.

    अब यह मुमकिन नहीं है..
    अदालत से बाहर आपसी सहमति से समस्या के निपटान के लिए अंसारी कहते हैं कि अब यह मुमकिन नहीं है. मेरे पिता और ज्ञानदास ने जब भी इस समस्या का हल निकालने की पहल की विहिप और अन्य संगठनों ने इस पर राजनीति शुरू कर दी. मामला आगे बढ़ने से पहले ही बयानबाजी और राजनीति शुरू हो गई. नारे लगने लगे कि बाबरी मस्जिद अयोध्या में बनने नहीं देंगे.

    हमारी लड़ाई भी उसी हक की है. वहां मस्जिद थी, हमारे पास उसके सबूत हैं और हमने अदालत में सबूत भी प्रस्तुत किये हैं. अब अदालत का जो भी फैसला होगा वह हमें मंज़ूर होगा.

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