गोद में बेटी को बैठा कर दिन भर रिक्शा दौड़ाती है ये मुस्लिम महिला, इस बहन के जज़्बे को हमारा सलाम…

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    बहादुरगढ़: हौसले अगर बुलंद हो और मन में कुछ करने की लगन हो तो तमाम मुश्किलें आसान होती चली जाती हैं. देवनगर में रहने वाली रूबी शहर की पहली महिला ई-रिक्शा ड्राइवर बन गई हैं. ई-रिक्शा चलाने वाले पति का गृहस्थी में हाथ बंटाने के लिए रूबी ने करीब 20 दिन पहले ई-रिक्शा चलाना शुरू किया है.

    घर पर कोई देखभाल करने वाला नहीं होने की वजह से वह अपनी 2 साल की बेटी खुशबू को भी साथ रखती हैं.

    इतनी होती है कमाई…
    1- रूबी ने बताया कि अक्टूबर 2015 में प्रमोद से शादी हुई थी. पति भी ई रिक्शा चलाता है, लेकिन इतनी कमाई नहीं हो पाती थी.

    2- उसने अपने पति से ई रिक्शा चलाना सीखा और एक शख्स से 300 रुपए प्रतिदिन ई रिक्शा किराए पर लेकर चलाना शुरू कर दिया.

    3- 200 से 400 रुपए प्रतिदिन की आमदनी हो जाती है. अगर उसका अपना ई-रिक्शा होता तो उसकी जिंदगी भी सुधर जाती.

    सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चलाती हैं ई-रिक्शा…
    1- रूबी सुबह 10 से लेकर शाम 5 बजे तक ई-रिक्शा चलाती हैं. वह कहती हैं कि काम तो सिर्फ काम होता है.

    2- इसका पुरुष या महिला होने से कोई लेना देना नहीं है. इसलिए महिलाओं को इस पिछड़ी मानसिकता को छोड़कर आत्मनिर्भर होने के रास्ते खुद तय करने चाहिए.

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