Home मज़हबी बहुत नर्म दिल थे हजरत मुहम्मद साहब, बच्चों से था उन्हें बेहद...

बहुत नर्म दिल थे हजरत मुहम्मद साहब, बच्चों से था उन्हें बेहद लगाव: राजीव शर्मा…

239
0
SHARE

इस्लाम में सबसे बड़े नायक हैं पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब. दुनिया में ऐसे लाखों मुसलमान हैं जिन्होंने जिंदगी में नहीं पढ़ा कि प्यारे नबी हकीकत में कैसे थे क्या चाहते थे, कैसी बातें किया करते थे. प्यारे नबी का पैगाम क्या था. आपका चरित्र क्या था? हर धर्म में एक दौर ऐसा आता है जब बुरे इरादों के साथ कोई व्यक्ति या गिरोह खड़ा होता है. मिसाल तब बनती है जब उसी धर्म के लोग उसके खिलाफ खड़े हों और उस विचार का खात्मा करें.

आज कुछ भटके हुए लोग इस्लाम के नाम पर ऐसे ही गिरोह बना रहे हैं. अच्छा हो कि उनके ताकतवर बनने से पहले मुसलमान उनके खिलाफ खड़े हों. वर्ना वह सबसे ज्यादा खून मुसलमान का ही बहाएंगे और बहा रहे हैं. गैर-मुस्लिम समाज की समस्या यह है कि वह इस बात को बहुत गौर से सुनता है कि टीवी क्या कहता है? लेकिन वह इस बात को नहीं सुनना चाहता कि कुरआन क्या कहता है.

अब मैं आपको अपनी ज़िंदगी की एक घटना सुनाता हूं. कुछ दिनों पहले मुझे फेसबुक पर किसी मित्र ने एक अखबार की तस्वीर भेजी. उसमें जिक्र था कि अफगानिस्तान में कोई शादी हुई जहां गाने-बजाने का कार्यक्रम हो रहा था. उसमें सिर्फ औरतें शामिल थीं. तालिबान को यह अच्छा नहीं लगा और उसने दूसरे दिन चार महिलाओं को गोली मार दी. उन मित्र का सवाल था राजीव, इस पर तुम्हारा क्या कहना है? अब मान भी लो, इस्लाम का सच्चा चेहरा यही है.

मैंने इस सवाल के बदले उनसे सवाल किया क्या आप कोई एक घटना बता सकते हैं जब हजरत मुहम्मद साहब ने किसी बच्ची या महिला को पीटा हो जान लेना तो बहुत दूर की बात है? इसके बाद उनका कोई जवाब नहीं आया. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया था मैंने बदले में तीन घटनाएं उन्हें लिख भेजीं. जरा आप भी पढ़िए.

1- प्यारे नबी हिजरत कर मदीना पहुंचे. उस दिन क्या बच्चे और क्या बच्चियां, सब स्वागत के गीत गा रहे थे. सुनकर आपने उनसे पूछा, क्या तुम मुझसे मुहब्बत करते हो? सभी ने कहा- जी हां. आपने बच्चों से स्नेह जताते हुए कहा मैं भी तुमसे मुहब्बत करता हूं.

2- ईद का दिन था. आप विश्राम कर रहे थे. चेहरा चादर से ढंक रखा था. इतने में ही कुछ बच्चियां आ गईं और गाने-बजाने लगीं. तभी हजरत अबू-बक्र (रजि.) आ गए. देखा नबी विश्राम कर रहे हैं, बच्चियां गीत गा रही हैं. कहीं इनके गाने-बजाने से आपके विश्राम में कोई बाधा न पहुंचे. उन्होंने बच्चियों को डांट दिया. यह सुनते ही आपने चेहरे से चादर हटाई और फरमाया: गाने दो, आज इनकी ईद है.

3- एक सहाबी अपने पुराने दिनों का किस्सा सुना रहे थे. तब वह इस्लाम में दाखिल नहीं हुए थे. उनके परिवार में बच्चियों को जिंदा दफन करने का रिवाज था. सहाबी ने कहा मैंने अपनी बच्ची को जिंदा ही दफन कर दिया. वह अब्बा-अब्बा पुकार रही थी मैं उस पर मिट्टी डाल रहा था. रब के रसूल ने सुना तो इतना रोए कि चेहरा आंसुओं से भीग गया.

हो सकता है कि आज संगीत सुनने पर आईएसआईएस किसी की गर्दन उड़ा दे, हो सकता है कि तालिबान, अल-कायदा पीट-पीटकर अधमरा कर दें और वह खुद को सच की राह पर मानें लेकिन उनके किसी दावे से पहले यह तो देख लें कि वह कितने सच्चे हैं.

हर दौर में ऐसे लोग पैदा हो जाते हैं जिनके इरादे बुरे होते हैं. वह लोगों के दिमाग पर कब्जा करना चाहते हैं ताकि उन पर कोई रोकटोक बाकी न रहे. हमने रावण और कंस जैसे दहशतगर्दों का दौर देखा है. उनके जवाब में राम व कृष्ण को आगे आना ही पड़ा. आज बगदादी, हाफिज सईद, अल-जवाहिरी जैसे आतंकी चेहरा बदलकर आ गए. यह रब के, कुरआन के, रसूल के और इस्लाम के दुश्मन हैं. इन्होंने सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानों का किया है.

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here