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मुस्लिम शासनकाल में मात्र ढ़ाई दिन में बनी थी ये मस्जिद, इस बादशाह ने कराया था निर्माण: इतिहास के पन्ने

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भारत में हर एक पर्यटन स्थल के पीछे कोई न कोई कहानी या किस्सा जुड़ा हुआ है, आज हम आपको एक ऐसी इमारत के बारे में बताने जा रहे है जिसे प्राचीनकाल में महज़ ढ़ाई दिन में बनवा दिया गया! यह बात सुनकर आप जरूर यह सोचने पर मजबूर हो गए होंगे कि आखिर ये कैसे मुमकिन हुआ होगा? यह इमारत राजस्थान के अजमेर में बनी हुई है, जिसे ‘ढ़ाई दिन का झोपड़ा’ के नाम से जाना जाता है!

आइये आपको रूबरू करवाते है कि इस इमारत कि तामीर महज़ ढ़ाई दिन में कैसे और क्यों हुई?

खूबसूरत इमारत की तामीर…
इतिहास के पन्नों को उठाकर देखें तो पता चलता है कि 11वीं सदी के आखिरी दशक में मौहम्मद गौरी ने तराई के युद्ध में महाराजा पृथ्वीराज चौहान को बुरी तरह परास्त कर दिया था और जब मौहम्मद गौरी की फौज ने अजमेर में प्रवेश के लिए कूच किया तो गौरी ने वहां नमाज अदा करने के लिए मस्जिद बनाने की हसरत जाहिर की!

उन्होंने हुक्म दिया कि मस्जिद की इस इमारत को जल्द से जल्द बनवाया जाए और मुहम्मद गौरी ने इसकी तामीर के लिए सिर्फ 60 घंटे का वक़्त दिया! मौहम्मद गौरी के हुक्म पर कुत्तुबदीन ऐबक ने इस इमारत को तामीर कराया! इस इमारत को आज देखने पर यह एक अधूरी सी इमारत लगती है जिसे जल्दबाजी में बनवाया गया कि यह ठीक से पूरी तरह बन भी नही पायी!

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क्या सच में इस इमारत का निर्माण ढाई दिन में हुआ ?
‘ढ़ाई दिन का झोपड़ा’ एक मस्जिद है जिसके पीछे एक मज़ेदार क़िस्सा है! इस इमारत को ढाई दिन में तैयार किया, क्या इस वजह से इसका नाम यह पड़ा! वहां रहने वाले लोगों का तो यह मानना है कि अक्सर यहां हर साल ढाई दिन का मेला लगता इस वजह से इसका नाम यह पड़ा न कि इसकी तामीर की वजह से! क्योकि लोगों का मानना है कि कोई कैसे इतनी जल्दी इतनी विशालकाय इमारत का निर्माण मात्र इतने कम समय में कैसे कर सकता है!

यह मस्जिद एक दीवार से घिरी हुई है जिसमें 7 मेहराबें हैं, जिन पर कुरान की आयतें लिखी गई हैं! हेरत के अबू बकर द्वारा डिजाइन की गई यह मस्जिद भारतीय- मुस्लिम वास्तुकला का एक उदाहरण है! बाद में 1230 ई. में सुलतान अल्त्मश द्वारा एक उठी हुई मेहराब के नीचे जाली जोड़ दी गई थी!

उत्तर में एक दरवाज़ा मस्जिद का प्रवेश द्वार है! सामने का भाग पीले बलुआ पत्थर से बनी कई मेहराबों द्वारा सजाया गया है! मुख्य मेहराब के किनारे छह छोटी मेहराबें एवं कई छोटे छोटे आयताकार फलक हैं जो प्रकाश तंत्र बनाते हैं! इस प्रकार की विशेषताएं अधिकतर प्राचीन अरबी मस्जिदों में पाई जाती है!

इस भवन के आंतरिक भाग में एक मुख्य कमरा है जो कई स्तंभों द्वारा समर्थित है! इस इमारत की उचाई काफी अधिक है ,संरचना को अधिक उंचाई प्रदान करने के लिए खंभों को एक के उपर एक रखा गया है जिसके कारण यह इमारत देखने पर बहुत सुंदर सी प्रतीत होती है!

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