Home मज़हबी अल्लाह के रसूल (स०अ०व०) ने फ़रमाया कि उस शख्स का वुज़ू नही...

अल्लाह के रसूल (स०अ०व०) ने फ़रमाया कि उस शख्स का वुज़ू नही जिसने इसके शुरू में…..

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नमाज़ पढ़ने से प्रथम छोटी और बड़ी पाकी (पवित्रता) प्राप्त करना अनिवार्य है। जो व्यक्ति नापाक (अपवित्र) हो, तो वह नमाज़ नहीं पढ़ सकता जब तक कि वह वुज़ू कर ले या ग़ुस्ल (स्नान) कर ले. फिर नमाज़ आरम्भ करे. इसी लिए वुज़ू का तरीक़ा बयान किया जाता है.

हज़रत अबू हुरैरा रदी अल्ल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि उस शख्स की नमाज़ नही जिसका वुज़ू नही और उस शख्स का वुज़ू नही जिसने इसके शुरू में बिस्मिल्लाह ना पढ़ी हो. (सुनन अबू दाऊद, जिल्द 1, 101)

हज़रत अबू सईद खुदरी रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि मोमिन दोज़ख़् से छुटकारा पा जाएँगे लेकिन दोज़ख और जन्नत के दरमियाँ एक पुल है जहा उन्हे रोक लिया जाएगा और फिर एक दूसरे पर किए गये ज़ुल्मों का बदला लिया जाएगा जो दुनिया में उनके दरमियाँ हुए थे.

जब सब कुछ सॉफ और पाक हो जाएगा (यानी सबको बदला मिल जाएगा) उसके बाद उन्हे जन्नत में दाखिल होने की ईजाज़त मिलेगी, उस ज़ात की कसम जिसके हाथ में मौहम्मद की जान है जन्नतियों में से हर कोई अपने घर को दुनिया में अपने घर की मुक़ाबले में ज़्यादा अच्छी तरह पहचान लेगा. सही बुखारी, जिल्द 8, 6535

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) साद (रज़ियल्लाहु अन्हु) के निकट से गुज़रे और वह वुज़ू कर रहे थे (और पानी का ज़्यादा इस्तिमाल कर रहे थे) आप ने कहा, यह क्या अपव्यय है? तो उन्होंने कहा, क्या वुज़ू में अपव्यय है? आप ने कहा, हां! और अगर तुम बहती नदी पर ही क्यो न हो? (इब्ने माज)

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