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अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया मुर्दों को बुरा मत कहो कि इससे जिंदो को …

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हज़रत मुगीरा बिन शोबा रज़ि० फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म ने इर्शाद फ़रमाया: मुर्दो को बुरा भला मत कहो कि उससे तुम ज़िन्दों को तकलीफ पहुंचाओगे. (तिर्मिज़ी)

फ़ायदा:
मतलब यह है कि मरने वाले को बुरा को बुरा–भला कहने से उसके अज़ीज़ों को तकलीफ होगी और जिसको बुरा भला कहा गया उसे कोई नुकसान नहीं होगा.
(मुन्तख़ब अहादीस सफा 526)

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रसूलअल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म ने फ़रमाया: जो आदमी किसी की एक बालिश्त ज़मीन भी नाहक दबाएंगे, तो क़यामत के दिन उसे सात ज़मीनों का तौक पहनाया जाएगा. [बुखारी: 2453, अन आयशा रज़ि०]

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हज़रत मालिक या इब्ने मालिक रज़ि० से रिवायत है कि उन्होंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म को यह इर्शाद फरमाते हुए सुना: जिस शख्स ने अपने वालिदैन या उनमें से एक को पाया. फिर उनके साथ बदसलूकी की, तो वह शख्स दोज़ख में दाखिल होगा और उसको अल्लाह तआला अपनी रहमत से दूर कर देंगे,

और जो कोई मुसलमान किसी मुसलमान गुनाह को आज़ाद कर दे, यह उसके लिए दोज़ख से बचाव का ज़रिया होगा. (मुन्तख़ब अहादीस सफा 513)

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हज़रत हानी रज़ि० से रिवायत है कि जब वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म की खिदमत में हाज़िर हुए , तो अर्ज़ किया: या रसूलुल्लाह! कौन– सा अमल जन्नत को वाजिब करने वाला है?

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म ने इर्शाद फ़रमाया: तुम अच्छी तरह बात करने और खाना खिलाने को लाज़िम पकड़ो. (मुन्तख़ब अहादीस सफा 557)

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