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झूठी खबर शेयर करना गुनाह है, जिसने भी यह अनदेखा किया उसे मिलेगा ऐसा अजाब, पढ़कर रूह कांप जाएगी

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झूठ बोलना या धोका देना इस्लाम में हराम है, क़ुरआन और हदीस में झूठ बोलने से सख्ती से मना किया गया है, आज सोशल मीडिया का ज़माना है, लोग झूठी बातों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं, और देखते ही देखते यह पूरी दुनिया में फ़ेल जाता है, कभी कभी तो ऐसे पोस्ट होते हैं, कि उस झूठी पोस्ट की वजह से लोगों के बीच नफरत की दीवार खड़ी हो जाती है.

वहीं कभी ऐसा भी होता है, झूठी खबर की वजह से लोग आपस में एक दूसरे की जान ले लेते हैं. इस्लाम ने इसी लिए झूठ से बचने का हुक्म दिया है, वहीं जो लोग झूठ से नहीं बचते हैं, और झूठ बोलते रहते हैं, उनके लिए सख्त सज़ा भी रखी है. क़ुरआन में है يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّـهَ وَكُونُوا مَعَ الصَّادِقِينَ [9-التوبة:119] ए ईमान वालों अल्लाह से डरो और सच्चों के साथ हो जाओ.

इसी तरह एक दूसरी आयात में है कि وَاجْتَنِبُوا قَوْلَ الزُّورِ [22-الحج:30] इस आयत में अल्लाह ताला ने बंदों को हुक्म दिया है कि झूठ से बचो. इसी तरह हदीस में कई जगह झूठ से बचने के लिए कहा गया है।एक हदीस में है कि عن عبد الله رضى الله عنه عن النبى صلى الله عليه وسلم قال : ‏‏‏‏ ”إن الصدق يهدي إلى البر وإن البر يهدي إلى الجنة وإن الرجل ليصدق حتى يكون صديقا وإن الكذب يهدي إلى الفجور وإن الفجور يهدي إلى النار وإن الرجل ليكذب حتى يكتب عند الله كذابا. [صحیح بخاری، حدیث 6094]

हज़रत अबुल्लाह आईबीने अब्बास रज़ी अललहू ताला अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्ल्लाहु अलैहि वासल्लम ने इरशाद फरमाया कि सच्चाई नेकी की तरफ ले जाती है, और नेकी जन्नत की तरफ ले जाती है, यहाँ कि आदमी सच्चों में लिख दिया जाता है, और झूठ बुराई की तरफ ले जाती है, और बुराई जहन्नुम की तरफ ले जाती है, यहाँ कि वह झूटों में लिख दिया जाता है.

जो लोग झूठ बोलते और झूठी खबर फैलाते हैं, उन्हें इस्लाम के मुताबिक क़यामत के दिन सख्त सज़ा दी जाएगी. झूठ बोलने वाले के बारे में अल्लाह के नबी ने फरमाया है, कि वह झूठ की वजह से जहन्नुम में जाएगा.

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