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रिवायत है हुज़ूर (स०) तीन रकात नमाज़ वित्र पढ़ा करते थे और पहली रकात में सुरह आला दूसरी…

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उबय बिन काब रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि रसूल्लअल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम 3 रकात वित्र पढ़ा करते थे पहली रकात में सुरह आला, दूसरी में सुरह अल-काफिरून और तीसरी रकात में सुरह अल-इख्लास तिलावत फरमाते थे.

फिर रुकु से पहले दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ते थे और जब फारिग होते तो 3 बार सुबहान अल-मलिक अल कुद्दुस पढ़ते और आखरी बार ज़रा तवील पढ़ते. सुनन नसाई , जिल्द 1, 1702-सही

आईशा रदी अल्लाहू अन्हा से रिवायत है की रसूल्लअल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम हर दो रकात पर सलाम फेरते और एक रकात वित्र पढ़ते. सुनन इब्न माज़ा ,जिल्द 1, 1177-सही

हज़रत उबय बिन कब रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल्लअल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम जब वित्र पढ़ते तो (दुआ ए) क़ुनूत रुकु से पहले पढ़ते. सुनन इब्न माज़ा, जिल्द 1, 1182 –सही

हज़रत अनस बिन मलिक रदी अल्लाहू अन्हु से सुबह की नमाज़ में क़ुनूत के बारे में पूछा गया तो उन्होने फरमाया हम रुकु से पहले और रुकु के बाद दोनो तरह से क़ुनूत पढ़ लेते थे. सुनन इब्न माज़ा ,जिल्द 1, 1183 – हसन

अबू अय्यूब अल-अंसारी रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल्लअल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया वित्र हक़ है और, जो चाहे 5 रकात वित्र पढ़े , जो चाहे 3 रकात वित्र पढ़े और जो चाहे 1 रकात वित्र पढ़े. सुनन इब्न माज़ा , जिल्द 1, 1190 –सही

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