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पढ़िए, हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की नाफ़रमान क़ौम को पानी के ज़लज़ले से दर्दनाक सज़ा देने का वाक़या…

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यह किस्सा है उस वक़्त का जब अल्लाह तआला ने जिस कौम की तरफ से जो पैगंबर भेजा ज्यादातर करके उस क़ौम को उस पैगंबर का ही नाम दिया इसीलिए जिस क़ौम की तरफ नूह अलैहिसस्सलाम भेजे गए उस क़ौम को क़ौम-ए-नूह कहा गया.

हज़रत नूह की क़ौम बुतपरस्ती में लगी हुई थी नूह अलैहिस्सलाम ने तकरीबन 900 या 950 बरस उनके बीच तब्लीग़ की, अल्लाह के दीन की तरफ बुलाया लेकिन उनकी क़ौम ना मानी यहां तक कि उनकी बीवी और लड़का सब बुतपरस्ती में लगे रहे.

आखिर में थक हार के उन्होंने रब की बारगाह में ये इल्तजा की ऐ मेरे रब मैंने अपनी कौम में दिन-रात तब्लीग की उन्हें हक़ की दावत दी लेकिन उन लोगों ने मुझे झुटला दिया और कुछ लोगों के अलावा बाकियों ने ईमान नहीं लाया यहां तक कि वो अपने कुफ़्र और हठधर्मी में हद से ज्यादा बढ़ गए अब ये इमान नहीं लाने वाले अब इनका फैसला तू ही कर.

अल्लाह तआला ने नूह अलैहिस्सलाम को एक बड़ी सी लकड़ी की नाव अपनी निगरानी में तैयार करने का हुक्म दिया अल्लाह तआला किसी क़ौम पर ऐसे ही अज़ाब नाज़िल नहीं करता पहले ओ उस कौम की इस्लाह के लिए नबियों और रसूलों को भेजता है ताकि वो रसूल या पैगंबर हक़ की दावत दे और खुशखबरी भी दे और इस पर भी वो क़ौम ना माने और और अपने गुनाहों से तौबा ना करें तो फिर अज़ाब नाज़िल करता है ताकि कोई हुज़्ज़त बाक़ी ना रहे.

नूह अलैहिस्सलाम पहले से बढ़ई (कारपेंटर) थे उन्होंने एक मैदान में नाव बनाना शुरू किया उनकी क़ौम के लोग आकर मजाक करते थे और कहते थे कि बड़े मियां पागल हो गए हो रेत में नाव चलाओगे क्या? जब नाव बनके तैयार हो गया तो अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि सब जानवर और परिंदे और जो लोग ईमान लाए हैं.

उनको सबको नाव में सवार कर लो हज़रत नूह अलैहिस्सलाम पूरे जी जान से और अंत तक हर तरीके से अपनी कौम को दिन की दावत देते रहें जब क़ौम के कुछ ही लोगों ने ईमान लाया और बाकी हठधर्म, ज़िद्दी और नूह अलैहिस्सलाम को तकलीफ देने वाले और उनका मजाक उड़ाने वाले रह गए तो नूह अलैहिस्सलाम ने दुआ की ऐ मेरे रब इन लोगों ने मुझे धोखा दिया झूटला दिया तू ही मेरी मदद फरमा.

तब अल्लाह तआला ने नूह अलैहिस्सलाम की तरफ वही कि “हमारी निगरानी और हिदायत के मुताबिक कश्ती बानाओ, और जब हमारा हुक्म हो जाए और तानूर उबलने लगे तो हर किस्म के जानवर और परिंदों के जोड़े से दो नर और मादा इसमें बैठा लेना और अपने घर वालों को भी ईमान वालों को

और जिन लोगों ने जुल्म किया इनके बारे में मुझसे कोई सवाल मत करना क्योंकि वो सब पानी में ग़र्क़ कर दिए जाएंगे और फिर तुम और जो तुम्हारे हमराह हो कश्ती में अच्छी तरह बैठ जाए तो कहना.

“सब तारीफ अल्लाह तआला के लिए है जिसने हमें जालिमों से निजात दी और ये भी कहना मेरे रब हमें बरकत वाली जगह पर उतारना, और तू सबसे बेहतर उतारने वाला है.

और फिर जब हजरत नूह अलैहिस्सलाम ने सबको कश्ती पर सवार कर लिया तो जमीन से पानी उबलना शुरू हो गया और तेज मूसलाधार बारिश होने लगी चारों तरफ पानी ही पानी हो गया कुफ़्फ़ार अपनी जान बचाने के लिए ऊंची जगह पर जाने लगे अब नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती पानी में धीरे धीरे ऊपर उठने लगी,

नूह अलैहिस्सलाम ने देखा कि उनका का काफ़िर बेटा पहाड़ी पर जा रहा है तो नूह अलैहिस्सलाम ने उसे आवाज दी बेटा जल्दी से नाव में सवार हो जाओ उसने जवाब दिया मैं पहाड़ी पर जा रहा हूं वहां मैं बच जाऊंगा.

नूह अलैहिस्सलाम ने कहा आज कोई नहीं बचने वाला और उनके देखते ही देखते एक ऊंची लहर उठी और उनके बेटे को बहा ले गई हज़रत नूह ने कहा “मेरे अल्लाह मेरा बेटा मेरे अपनों में से है, अल्लाह तआला ने फरमाया तुम्हे इस बात का इल्म नहीं उसके बारे में सवाल मत करो वो तुम्हारे अपनों में से नहीं था, तुम्हारे अपने वो है जो ईमान लाए.

कई दिनों तक मुसलाधार बारिश होती रही और जमीन से पानी निकलता रहा जहां तक नजर जाती थी हर तरफ पानी ही पानी था सभी काफिर और उनके बुत और जो कुछ भी ज़मीन पर था सब पानी में ग़र्क़ हो गया. फिर अल्लाह तआला ने आसमान को हुक्म दिया के पानी बरसाना रोक दे, और जमीन को भी हुक्म दिया के पानी उगलना बंद कर दे.

कश्ती कई दिनों तक पानी में तैरती रही, कश्ती में चूहे हो गए जो अनाज के गल्ले को नुकसान पहुंचाने लगे, तन नूह अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला से दुआ कि अल्लाह तआला ने कहा शेर की पुश्त पर हाथ मारो, हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने शेर की पुष्ट पर हाथ मारा तो बिल्ली पैदा हुई और उसने सारे चूहों को खा लिया.

इसी तरह कश्ती में गंदगी पैदा होने लगी तो नूह अलैहिस्सलाम ने फिर अल्लाह तआला से दुआ की अल्लाह तआला ने कहा हाथी की पुश्त पर हाथ मार, जब नूह अलैहिस्सलाम ने हाथ मारा तो बदजानवर जानवर पैदा हुआ और उसने सारी गंदगी साफ कर दी.

अब धीरे-धीरे पानी कम होने लगा नूह अलैहिस्सलाम सलाम की कश्ती जूदी नाम की एक पहाड़ी पर जाकर रुकी हज़रत नूह एक कौवे को भेजा कि जाकर पता लगाएं कि पानी कितना कम हुआ है वो कौवा वापस नहीं आया उसको जानवर खाने को मिल गए वो उन्हीं को खाने में मस्त हो गया और अपना काम भूल गया। इसलिए कौवे के हक में दुआ है कि वह मुर्दार ही खाएंगे और लोग उस से नफरत करेंगे.

नूह अलैहिस्सलाम ने फिर एक कबूतर को बाहर की खबर लाने को भेजा वह पहली बार वापस आया तो उसके पैरों में पानी लगा था नूह अलैहिस्सलाम समझ गए कि अभी पानी पूरी तरह खुश्क नहीं हुआ, कुछ दिनों के बाद फिर उसे भेजा जब वह वापस आया तो उसके पैरों में कीचड़ लगा था|.

नूह अलैहिस्सलाम समझ गए कि अभी जमीन खुश्क नहीं हुई, फिर तीसरी बार उसे भेजा तो उस की चोंच में एक पौधा था नूह अलैहिस्सलाम समझ गए की जमीन खुश्क हो चुकी है इसलिए कबूतर के हक़ में दुआ है कि वो दाने खाएगा और लोग उससे प्यार करेंगे इस तरह नूह अलैहिस्सलाम और उनके साथी जमीन पर फिर आबाद हुए और उन्हीं से इंसानी नस्ल आगे बढ़ी.

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