Home अपराध भीम आर्मी बनाने वालों में से एक जेल में है और दूसरे...

भीम आर्मी बनाने वालों में से एक जेल में है और दूसरे को गोली मार दी गई…..

2237
0
SHARE

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक जिला है सहारनपुर. पिछले दो साल से ये जिला दलितों और सवर्णों के बीच हो रही हिंसा का सबसे बड़ा गवाह बना हुआ है और इसकी गवाही के लिए हर साल दो महापुरुषों की जयंतियों का सहारा लिया जाता है. इनमें से एक हैं महाराणा प्रताप जिनपर पूरे देश को नाज है. लेकिन सहारनपुर के ठाकुरों के लिए महाराणा प्रताप एक प्रतीक से बढ़कर हैं.

दूसरा नाम है संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉक्टर भीम राम आम्बेडकर का. सहारनपुर के दलितों के लिए ये नाम भी एक प्रतीक से बढ़कर ही है. और जब बड़े प्रतीक का दायरा सिमटकर किसी खास समुदाय के साथ जु़ड़ जाए तो वो आपसी टकराव के लिए मुफीद हो जाता है.

सहारनपुर में 2017 में भी महाराणा प्रताप की जयंती पर हिंसा हुई थी, जिसमें एक की मौत हो गई थी. सहारनपुर में भी यही हुआ है. इसकी कहानी शुरू होती है 2015 से. सहारनपुर में एक छोटा सा गांव है छुटमुलपुर. यहां पर एक इंटर कॉलेज है. ए.एच.पी. इंटर कॉलेज. इलाके में ठाकुरों का बोलबाला है.

2015 में इस कॉलेज में पढ़ने वाले दलित छात्र रोज-रोज के अपमान से तंग आकर स्थानीय वकील के पास पहुंचे. यह वकील इसी गांव का रहने वाला था. इसी इंटर कॉलेज में पढ़ चुका था. तय हुआ कि ठाकुरों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाए. इसके लिए एक संगठन बनाया गया और उसका नाम रखा गया भीम आर्मी.

और लोग जिस वकील के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे, उसका नाम था चंद्रशेखर. चंद्रशेखर ने खुद के नाम के आगे रावण लगा लिया और फिर पश्चिमी यूपी में दलितों के उत्थान के लिए संगठन के तहत काम करने लगा.

सहारनपुर के एक वकील चंद्रशेखर ने दलितों को एकजुट कर भीम आर्मी बनाई है.
दो साल तक तो सब ठीक चलता रहा. 14 अप्रैल 2017 को भीम आर्मी ने सहारनपुर के शब्बीरपुर में आंबेडकर जयंती पर जुलूस निकालने का फैसला लिया और इस फैसले ने ही सहारपुर को जातीय हिंसा की आग में झोंक दिया. आंबेडकर जयंती पर शब्बीरपुर में आंबेडकर की मूर्ति लगाने को विवाद हुआ, जिसके बाद दलितों और ठाकुरों के बीच संघर्ष हो गया.

किसी तरह से मामला सुलटता दिखा कि फिर महाराणा प्रताप जयंती आ गई. इस बार ठाकुरों की ओर से महाराणा प्रताप जयंती मनाने का फैसला हुआ और फिर हिंसा हुई, जिसमें सुमित नाम के एक ठाकुर की मौत हो गई. इस हिंसा के बाद से सहारनपुर कभी शांत नहीं हो सका. इसी हिंसा के बाद चंद्रशेखर ने जंतर-मंतर पर पिछले एक दशक की दलितों की सबसे बड़ी भीड़ इकट्ठी की थी और इसी हिंसा के आरोप में रासुका लगने के बाद से ही चंद्रशेखर जेल में है.

और इसी का नतीजा है कि उस घटना के एक साल बाद 9 मई 2018 को महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर भीम आर्मी के एक नेता सचिन वालिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई. ये वो सचिन वालिया था, जो 2017 में हुई हिंसा के आरोप में जेल में बंद था और हाल ही में जमानत पर बाहर आया था और जिसने भीम आर्मी के गठन में भी बड़ा रोल अदा किया था.

जिस सहारनपुर जिले से भीम आर्मी पैदा हुई, वहां इस संगठन के अध्यक्ष के पद पर कमल वालिया की तैनाती है. 2017 में पहले आंबेडकर जयंती और फिर महाराणा प्रताप जयंती पर हुई हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने इस बार आंबेडकर जयंती मनाने की इजाजत नहीं दी थी. जब महाराणा प्रताप जयंती आई, तो भीम आर्मी ने प्रशासन से कहा कि वो इस जयंती के लिए भी इजाजत न दे.

लेकिन प्रशासन की ओर से 200 लोगों को महाराणा प्रताप जयंती मनाने की इजाजत मिल गई. महाराणा प्रताप भवन पर 200 लोग जयंती मनाने पहुंचे और 800 पुलिसवाले शांति बनाने के लिए. दोपहर तक सब ठीक था. अचानक महाराणा प्रताप भवन से कुछ ही दूरी पर एक गोली चली, जो भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया को लगी और उसकी मौत हो गई. घरवालों का कहना था कि सचिन घर से नाश्ता लेने निकला था तभी उसे गोली मार दी गई.

2017 में महाराणा प्रताप की जयंती पर सुमित की मौत हुई थी और ठीक एक साल बाद उसी दिन सचिन वालिया की हत्या कर दी गई.
इसके बाद से सहारनपुर एक बार फिर से जातीय हिंसा की आग में झुलस गया. भीम आर्मी के हजारों लोग सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे, जिसके बाद प्रशासन की ओर से जिले की इंटरनेट सेवा रोक दी गई और पूरे जिले में फोर्स तैनात कर दी गई.

लेकिन भीम आर्मी और दलित समुदाय इस हत्या के लिए सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहा था. सचिन वालिया की मां शांति वालिया ने बेटे सचिन की हत्या के लिए दीपक राणा उर्फ कान्हा, शेर सिंह राणा, उपदेश राणा और नागेंद्र राणा पर हत्या का केस दर्ज करवाया है. वहीं शांति का आरोप है कि एसपी सिटी प्रबल प्रताप ने जयंती मनाने की इजाजत देकर हत्या की साजिश रची, इसलिए उनको सस्पेंड किया जाना चाहिए.

सचिन की हत्या के बाद सहारनपुर में हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि पूरे जिले में सामान्य आदमी कम और पुलिस फोर्स ज्यादा दिख रही है. भीम आर्मी के प्रदर्शन की वजह से सचिन का 10 मई की सुबह पोस्टमॉर्टम हो सका. हालांकि पुलिस अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है कि सचिन को गोली किसने मारी है.

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here