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शर्मनाक, रामनवमी की झांकियों के बीच निकाली गई हत्यारे शंभू रैगर की झांकी…..

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शंभू रैगर की हरकत सभ्य समाज के लिए शर्म का बाइस है. हम इस शर्म को अपने सीने पर तमगे की तरह लटकाकर कैसे घूम सकते हैं? 25 मार्च, 2018. भगत सिंह की शहादत दिवस के दो दिन बाद देश राम नवमी का त्योहार मना रहा था. जगह-जगह भगवान राम की झांकी निकाली जा रही थीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जनता को राम नवमी की बधाई दे रहे थे. ठीक इसी वक़्त जोधपुर में लोग सड़कों पर राम नवमी के मौके पर निकल रही झांकी देख रहे थे. राम दरबार, लंका दहन, बाली वध जैसी कई झांकियां एक के बाद एक निकल रही थीं.

श्रद्धा से भरे हुए लोग हाथ जोड़ रहे थे. इसी बीच एक झांकी आई, जिसका राम कथा से कोई लेना-देना नहीं था. यह झांकी थी शंभू रैगर की. वही शंभू जिसने 7 दिसंबर, 2017 को राजस्थान के राजसमंद जिले में एक बंगाली मुस्लिम मजदूर की हत्या कर दी थी. झांकी के आगे लगे हुए बैनर का मजमून था-

हिंदुओं भाइयों जागो, अपनी बहन-बेटी बचाओ. लव जिहाद से देश को आजाद करवाना चाहिए. इस बैनर के दाएं कोने पर शंभू रैगर की तस्वीर लगी हुई थी. इसके नीचे लिखा हुआ था, ‘शम्भूनाथ रैगर, लव जिहाद मिटाने वाले’. दूसरे कोने पर हरि सिंह राठौड़ की तस्वीर थी जिन्होंने इस बैनर को छपवाया था.

हरि सिंह राठौड़ जोधपुर में शिवसेना के सह-कोषाध्यक्ष हैं. वो आरएसएस से भी जुड़े रहे हैं. फेसबुक पर उनकी आईडी ‘हरि सिंह हिंदू’ के नाम से है. जब हमने उनसे यह जानना चाहा कि उनके दिमाग में यह विचार कहां से आया तो हरि सिंह का जवाब था.

मैं पूरे देश की नहीं कहता लेकिन जोधपुर में ज्यादातर मुस्लिम लड़के दो नंबर के काम में लगे हुए हैं. इससे उनके पास खूब पैसा आता है. ये पैसा वो लड़कियों पर उड़ाते हैं. आज-कल की लड़कियों भी बहुत सोचती नहीं है. वो बस पैसे को देखती हैं और इन मुस्लिम लड़कों के चक्कर में फंस जाती हैं.

ये लड़के एक के बाद एक हिन्दू लड़की से शादी करते हैं और धर्म परिवर्तन करवाकर उनका शोषण करते हैं. हम इस मामले में जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

जब उनसे पूछा गया कि क्या शंभू रैगर ने जो किया वो ठीक किया? राठौड़ का जवाब है- पकिस्तान में इल्मुद्दीन को आज ‘गाज़ी इल्मुदीन’ के तौर पर याद किया जाता है. 31 अक्टूबर के रोज उसका शहादत दिवस मनाया जाता है. नफ़रत की बुनियाद पर यह देश पिछले 71 साल में फौजी तानाशाह देख चुका है.

शंभू रैगर की हरकत सभ्य समाज के लिए शर्म का बायस है. हम इस शर्म को अपने सीने पर तमगे की तरह लटकाकर कैसे घूम सकते हैं? ऐसा करने वाले लोग हमें उसी अंधे कुएं में धकेल रहे हैं जिससे हमारा पड़ोसी मुल्क पिछले सत्तर दशक से निकलने की जद्दोजहद में लगा हुआ है.

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