Home इतिहास सऊदी अरब का एक ऐसा शहर जहॉं कोई आता जाता ही नहीं….

सऊदी अरब का एक ऐसा शहर जहॉं कोई आता जाता ही नहीं….

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सऊदी अरब के रेगिस्तान के बीच एक ऐसा शहर जहाँ कोई आता जाता ही नहीं है. इस शहर का नाम है मदैन सालेह. यह सऊदी अरब के हेजाज़ सूबे में पड़ता है और यह राजधानी रियाज से क़रीब एक हज़ार किलोमीटर दूर है. टूरिस्ट गाइड बताते हैं कि मदैन सालेह, स्पाइस रूट का बेहद अहम हिस्सा था. पूर्वी देशों से मसाले लादकर आते हुए ऊंटों के कारवां यहां रुका करते थे. मदैन सालेह का इलाक़ा नखलिस्तान था. लेकिन यहां पानी की सुविधा थी. इसलिए रेगिस्तान में सफ़र करने वाले यहां रुककर आराम करते. प्यास बुझाते. और आगे के सफ़र के लिए पानी लेते थे और आगे बढ़ते थे.


यहां पर 131 क़ब्रें क़तर से बनी हुयी है…
यहां पर 131 क़ब्रें क़तर से बनी हुयी है. और यह शानदार क़ब्रें हैं. शायद ये राजशाही के सदस्यों की क़ब्रें हैं. इन पर तरह-तरह की नक़्क़ाशी की हुई है. मक़बरों पर लिखी इबारत से मदैन सालेह के बाशिंदों के बारे में दिलचस्प मालूमात हासिल होती है. मसलन उनके नाम क्या थे. वो किस ख़ानदान से ताल्लुक़ रखते थे. वो क्या काम करते थे और किस देवता को पूजते थे. मदैन सालेह के सभी मक़बरों में क़स्र अल फरीद का मक़बरा सबसे मशहूर और विशाल है. यहां से रेगिस्तान में दूर तक नज़र जाती है. सुनहरे पत्थर की इमारत यूं लगती है मानो कोई टीला रेगिस्तान में से निकला हुआ हो.

मदैन सालेह के पास ही जबाल इथलिब स्थित है….
मदैन सालेह के पास ही जबाल इथलिब स्थित है. कहा जाता है कि यहा नेबेतियन देवता दुशारा को पूजा जाता था. दुशारा, पहाड़ों का देवता था. जबाल इथलिब स्थित मंदिर की दीवारों पर दूसरे देवी-देवताओं की तस्वीरें भी उकेरी गई हैं. इस इलाक़े में पुरानी नहरों के निशान भी मिलते हैं, जिनके ज़रिए नेबेतियन लोग पानी को जमा करते थे. लेकिन आज यहां रेगिस्तान के बीचो-बीच बचे हुए खंडहर बचे हैं. जो सदियों पहले के सुनहरे दौर की गवाही देते हैं.

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