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वो छोटी छोटी गलतियाँ, जिनसे टूट जाता है रोज़ा; पढ़कर शेयर करें और सवाब कमायें

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रमज़ान के महीने में सभी मुस्लमान पूरी शिद्दत से रोज़े रखते हैं और कोशिश करते हैं कि वो अल्लाह के करीब जा सकें! शदीद गर्मी के बावजूद सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए ये रोजदार रोज़ा रखते हैं लेकिन उनका रोज़ा पूरा नहीं हो पता है! क्योंकि छोटी-छोटी गलतियों के चलते रोज़दार का रोज़ा टूट जाता है और उसको पता भी नहीं चलता! ऐसा अक्सर इल्म की कमी की वजह से भी होता है!

ये हैं वो गलतियाँ जिनकी वजह से टूट जाता है रोज़ेदार का रोज़ा…

1- कान और नाक में दवा डालने से.
2- क़सदन अपने इख्तियार से मुंह भर उलटी करने से.
3- रोज़ा याद रहते हुए कुल्ली करते वक़्त हलक़ में पानी चला जाना.
4- औरत या किसी मर्द को छूने वग़ैरह से इंजाल हो जाना.
5- कोई ऐसी चीज़ निगल जाना जो आमतौर पर खाई नहीं जाती जैसे लकड़ी, लोहा और कच्चे गेहूं का दाना वग़ैरा.
6- लोबान या ऊद वग़ैरह का धुंआ कसदन नाक या हलक़ में पहुँचाना, बीड़ी सिगरेट और हुक़्क़ा पीना.
7- भूलकर खा-पी लिया और याद आने पर ये ख्याल किया कि अब तो रोज़ा टूट गया और फिर कसदन खा-पी लिया.
8- रात समझकर सुबह सादिक़ के बाद सहरी करने पर.
9- दिन बाक़ी था मगर ग़लती से ये समझ कर कि आफ़ताब गुरूब हो गया हे अफ्तार कर लिया (वक़्त से पहले रोज़ा इफ्तार कर लेना).

इन सब चीज़ों से रोज़ा टूट जाता है लेकिन इस सूरत में रोज़े की सिर्फ क़ज़ा वाजिब होती है यानि ईद के बाद वो रोज़ा रखना पड़ता है! कफ़्फ़ारा अदा करना लाज़िम नहीं होता! लेकिन जान बूझकर बीवी से सोहबत करने या खाने पीने से रोज़ा टूट जाता है और इस सूरत में क़ज़ा भी लाज़िम होती है और कफ़्फ़ारा भी,

क्या है कफ़्फ़ारा…???
कफ़्फ़ारा यह है कि 60 रोज़े लगातार रखें और बीच में नागा (गैप) ना हो, अगर नागा हो गया तो फिर से लगातार 60 रोज़े पूरे करने पड़ेंगे, और अगर रोज़े रखने की ताक़त नहीं तो फिर 60 मिस्कीनों को दोनों वक़्त पेट भरकर खाना खिलाना होता है!

अल्लाह हम सब को सही तरीक़े से मुकम्मल रोज़े रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाये, और इस मुबारक महिने की क़द्र करने की तोफ़ीक़ अता फ़रमाये! आमीन…

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