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बीजेपी इस लिए उठा रही तीन तलाक़ का मुद्दा; डॉ अर्शी खान का विशेष लेख

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केन्द्र मे भाजपा सरकार बने तीन साल बीत चुके हैं! मंहगाई आसमान छू रही है, जवान शहीद हो रहे है, यूपी मे पुलिस पिट रही है, कश्मीर मे पत्थरबाज़ी हो रही है, पर इनकी समस्या है मुसलमानों में 3 तलाक़!

ढाई करोड़ लोगो को रोज़गार देने का वादा करने वाली भाजपा सरकार ढाई लाख लोगो को भी नौकरी नही दे पाई है, न ही काला धन वापिस आया और न ही लोगो के खातो मे कुछ पैसा जमा हो पाया! अब मोदी सरकार जो अपने चुनावी दावे और वादे पूरे करने पर पूरी तरह से असमर्थ है उसने अपनी नकामयाबी छिपाने और लोगो का ध्यान भटकाने के लिए “तीन तलाक” का विवादास्पद मुद्दा उठाया है! भाजपा सरकार तीन तलाक समाप्त करने की बात मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए नही बल्कि वोटो का ध्रुविकरण करने के लिए कर रही है! समान नागरिक संहिता लागू करने का राग छेड़कर भाजपा ने हिंदू और मुसलमानो को आमने सामने खड़ा कर दिया है! यह आने वाले चुनाव के लिए वोटो का ध्रुवीकरण करने की एक खतरनाक राजनीतिक साजिश है! जब जब तीन तलाक का विवादास्पद मुद्दा गरमाएगा तब तब “शाहबानो” को याद किया जाएगा! बहुत कम लोग जानते हैं कि शाहबानो प्रकरण ने किस तरह देश की राजनीति को बदलकर रख दिया था!

इंदौर मे रहने वाली शाहबानो के तीन तलाक और कानूनी फैसले से देश भर मे राजनीतिक बवाल मच गया था और राजीव गांधी सरकार ने एक साल के अंदर तलाक मे सरंक्षण का अधिकार अधिनियम 1986 मे पारित करवा कर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया था! लेकिन अहम बात यह है कि उस समय जिसने राजीव गांधी सरकार मे यह फैसला पलटवाया था वह व्यक्ति आज मोदी सरकार मे मंत्री है! समान संचार संहिता की वकालत करने वाले मौजूदा भाजपा सरकार मे विदेश राज्यमंत्री “एम जे अकबर” ही थे जिन्होने शाहबानो मामले मे प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलकर अदालत का फैसला पलटवाया था! पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने इसकी पुष्टि करी है!

गौरतलब है इंदौर की रहने वाली मुस्लिम महिला शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने 1978 मे तलाक दे दिया था! पांच बच्चों की माँ 62 वर्षीय शाहबानो ने गुज़ारा भत्ता पाने के लिए लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी और 1985 में पति के खिलाफ गुजारा भत्ता पाने का केस जीत भी लिया! लेकिन मुस्लिम धर्म गुरुओं और मुस्लिम संगठनो ने अदालत के इस फ़ैसले को शरिया मे दखलअंदाजी कह कर इसका भरपूर विरोध किया और राजीव गांधी की सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग करी! उस समय वजाहत हबीबुल्लाह पी.एम कर्यालय मे निदेशक के पद पर कार्यरत थे और अल्पसंख्यक मुद्दो को देखते थे!

वजाहत हबीबुल्लाह बताते हैं “एक दिन जब मैने प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चैंबर मे प्रवेश किया तो वहां प्रधानमंत्री के सामने “एम जे अकबर” बैठे थे और राजीव गांधी को इस बात पर राजी कर रहे थे कि यदि केन्द्र सरकार शाहबानो मामले मे हस्तक्षेप नही करती है तो पूरे देश मे ऐसा संदेश जाएगा कि राजीव गांधी मुस्लिम समुदाय को अपना नही मानते हैं!

उल्लेखनीय है कि एम.जे अकबर 1989-1991 मे बिहार के किशनगंज से सासंद चुने गए थे! वह कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता भी रहे हैं और आज कल वह नरेंद्र मोदी की मौजूदा केंद्र सरकार जो कि तीन तलाक मुद्दे का फिर से राजनीतिकरण कर रही है उस सरकार मे मंत्री है!

भाजपा मुस्लिम संगठनो को तीन तलाक मुद्दे के विरुद्ध खड़ा करवा कर उनकी तरफ़ से हाए तौबा मचवा देना चाहती है! भाजपा चाहती है कि रोज़ न्यूज़ चैनलो पर तीन तलाक को लेकर खूब चर्चाए और डिबेट हो और मुस्लिम उलेमा इस का पुरजोश विरोध करें! क्योकि जितना इसका विरोध होगा उतना ही बीजेपी का धार्मिक आधार पर वोटो का ध्रुवीकरण करने का एजेंडा पूरा होगा!

दरअसल समानसिविल कोड की बात ही बेमानी है, क्या आज तक इस पर सभी धर्मो, समुदायो और जातियों से सहमति ले ली गई है?? यह तीन तलाक और समान सिविल कोड सिर्फ समाज को हिंदू मुसलमान मे बांट कर आगामी चुनाव मे फाएदा लेने की राजनीतिक रणनीति है! भारत मे हर कोई अपने पर्सनल ला के हिसाब से ज़िंदगी जी सकता है और इसमे किसी को कोई आपत्ति नही होनी चाहिए!

लेखक: डॉ अर्शी खान (Sharjah, UAE)

Dr Arshi Khan

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