Home इतिहास कौम के सरपरस्तों से सर सय्यद की गुज़ारिश: 1883 में लुधियाना में...

कौम के सरपरस्तों से सर सय्यद की गुज़ारिश: 1883 में लुधियाना में की थी तक़रीर…

158
0
SHARE

देश के हालत ऐसे होते जा रहे हैं कि देश के नेता धर्म के नाम पर देश को बटने में लगे हुए हैं! लेकिन सभी देश वासियों को सब्र से काम लेना चाहिए और एक दुसरे का साथ देना चाहिए! आज हम आपको सर सय्यद के भाषण का कुछ हिस्सा बताने जा रहे हैं!

सर-परस्तों से ग़ुज़रिश

ऐ मेरी क़ौम के लोगों!
अपने अज़ीज़ और प्यारे बच्चों को ग़ारत ना करो! इन की परवरिश करो! इनकी आइन्दा ज़िन्दगी अच्छी तरह बसर होने का सामान करो! मुझको तुम कुछ ही कहो ! मेरी बात सुनो ना सुनो- मगर ये याद रखो कि अगर तुम एक क़ौमी तालीम के तौर पर इनको तालीम ना दोगे तो वोह आवारा और ख़राब होंगे! तुम इनकी अब्तर हालत को देखोगे और बेचैन होगे-रोगे और कुछ ना कर सकोगे! तुम अगर मर जाओगे तो अपनी औलाद की ख़राब ज़िन्दगी देख कर तुम्हारी रूहें क़ब्रों में तड़पेंगी और तुम से कुछ ना हो सकेगा!

अभी वक़्त है और तुम सब कुछ कर सकते हो मगर याद रखो कि मैं ये पेशीनगोई करता हूँ कि अगर और चंद रोज़ तुम इसी तरह ग़ाफ़िल रहे तो एक ज़माना ऐसा आवेगा कि तुम चाहोगे कि अपने बच्चों को तालीम दो, इनकी तरबियत करो, मगर तुमसे कुछ ना हो सकेगा ! मुझ को कुछ कहो- काफ़िर, मल्हार, नीचरी या कुछ और….
मैं तुम से ख़ुदा के सामने कुछ सिफ़ारिश नहीं चाहता ! मैं तुम से अपनी शफ़ाअत के वास्ते ख़्वास्तगार ना होऊंगा ! मैं जो कुछ कहता हूँ तुम्हारे बच्चों की बेहतरी के लिए कहता हूँ! तुम इन्ही पर रहम करो और ऐसा कुछ करो कि आइन्दा पछताना ना पड़े !

लेक्चर बा-मुक़ाम लुधियाना, 23 जनवरी 1883

फेसबुक पर पेज लिखे करने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here